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मैं ऐसा क्यों हूँ ? पट्टू तोता बड़ा उदास बैठा था . मैं ऐसा क्यों हूँ ? माँ ने पुछा , ” क्या हुआ बेटा तुम इतने  उदास क्यों हो ?” ” मैं अपनी इस अटपटी चोंच से नफरत करता हूँ !!”, पट्टू लगभग रोते हुए बोला . “तुम अपनी चोंच से नफरत क्यों करते हो ?? इतनी सुन्दर तो है !”, माँ ने समझाने की कोशिश की . “नहीं , बाकी सभी पक्षियों की चोंच कहीं अच्छी है …. बिरजू बाज , कालू कौवा , कल्कि कोयल … सभी की चोंच मुझसे अच्छी है…. पर मैं ऐसा क्यों हूँ ?”, पट्टू उदास बैठ गया . माँ कुछ देर शांति से बैठ गयी , उसे भी लगा कि शायद पट्टू सही कह रहा है , पट्टू को समझाएं तो कैसे …। तभी उसे सूझा कि क्यों ना पट्टू को  ज्ञानी काका के पास भेजा जाए , जो  पूरे जंगल में सबसे समझदार तोते के रूप में जाने जाते थे . माँ  ने  तुरंत ही पट्टू को काका के  पास भेज दिया . ज्ञानी काका जंगल  के बीचो -बीच एक बहुत पुराने  पेड़  की शाखा पर  रहते थे। पट्टू उनके समक्ष जाकर बैठ गया और पुछा , ” काका , मेरी एक समस्या है !” “प्यारे बच्चे तुम्हे क्या दिक्कत है , बताओ मुझे “, क...
शक्ति जीवन है, दुर्बलता ही मृत्यु एक बहुत बड़े ठेकेदार के यहां हजारों मजदूर काम करते थे। एक बार उस क्षेत्र के मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल कर दी। महीनों हड़ताल चलती रही। नतीजतन मजदूर भूखे मरने लगे और रोजी-रोटी कमाने के लिए दूसरी बस्तियों में चले गए, लेकिन दूसरी बस्तियों के गरीब मजदूर इस बस्ती में आ पहुंचे। ठेकेदार नित्य ही ऐसे लोगों की तलाश में रहता था, जो उसके ठेके का काम पूरा कर सकें। अत: एक दिन वह बस्ती के चौराहे पर आकर खड़ा हो गया। तभी एक मजदूर कंधे पर कुदाली रखे वहां आया। ठेकेदार ने उससे पूछा- क्या मजदूरी लेगा? मजदूर ने कहा- बारह आने। ठेकेदार ने उससे कहा -अच्छा दूंगा, जाकर मेरे ईंटों के भट्ठे के लिए मिट्टी खोदो। इसके बाद एक दूसरा मजदूर वहां आया, ठेकेदार ने उससे भी मजदूरी पूछी। वह बोला- तीन रुपए। ठेकेदार ने उसे खान में कोयला खोदने भेज दिया। तीसरे मजदूर ने बड़े ताव से दस रुपए अपनी मजदूरी बताई। ठेकेदार ने उसे हीरे की खान में भेज दिया। शाम को तीनों मजदूरी लेने पहुंचे। पहले ने सौ टोकरी मिट्टी खोदी। दूसने ने दस मन कोयला निकाला और तीसरे को एक हीरा मिला। तीनों के हाथ पर जब ...
कौन किसका मालिक एक दिन एक सूफ़ी  संत 'शेख़ फरीद' अपने शिष्यों के साथ बैठे थे.तभी एक आदमी वहां से एक गाय को ज़बरदस्ती खींचता हुआ निकला .यह देखकर फरीद ने अपने शिष्यों से पूछा ," तुम्हारे विचार में कौन किससे बंधा है ?" उसके शिष्यों ने जवाब दिया कि स्पष्टतया गाय ही उस आदमी से बंधी है . फरीद ने फिर पूछा ,"अच्छा यह बताओ ,कौन किसका मालिक है ?" सब शिष्य इस अजीब से ( absurd) प्रश्न पर हंसने लगे और बोले कि वेह आदमी ही मालिक था और कौन ? गाय तो पशु है ,वह मनुष्य कि स्वामिनी कैसे हो सकती है ?" " अच्छा , यह बताओ कि अग़र रस्सी को तोड़ दिया जाय तो क्या होगा " फरीद ने पूछा . शिष्यों ने उत्तर दिया ," तब तो गाय भागने की कोशिश करेगी ."  ............... "और फिर उस आदमी का क्या होगा ?" फरीद ने पूछा "स्पष्ट रूप से तब तो यह आदमी गाय का पीछा करेगा , गाय के पीछे -पीछे भागेगा ." तुरंत जवाब आया . जैसे ही शिष्यों ने यह जवाब दिया , वे समझ गए कि कौन किससे बंधा है ? आज यदि हम सोचें कि आज के परपेक्ष्य में हम लोग कार ,स्कूटर,बाइक,लैपटॉ...
शेर , लोमड़ी और भिक्षुक  एक  बौद्ध भिक्षुक भोजन  बनाने  के  लिए  जंगल  से  लकड़ियाँ  चुन  रहा  था कि  तभी  उसने  कुछ अनोखा   देखा , शेर लोमड़ी और भिक्षुक “कितना अजीब है ये  !”, उसने   बिना  पैरों  की  लोमड़ी  को  देखते  हुए  मन  ही  मन   सोचा . “ आखिर  इस  हालत  में  ये  जिंदा  कैसे  है ?” उसे  आशचर्य  हुआ , “ और  ऊपर  से  ये  बिलकुल   स्वस्थ  है ” वह  अपने ख़यालों  में  खोया  हुआ  था  की   अचानक  चारो  तरफ  अफरा – तफरी  मचने  लगी ;  जंगल  का  रजा  शेर  उस  तरफ  आ  रहा  था .  भिक्षुक भी  तेजी  दिखाते  हुए  एक  ऊँचे  पेड़  पर  चढ़  गया , और  वहीँ  से  सब  कुछ  देखने  लगा .  शेर ...
दो नगीने किसी शहर में एक रब्बाई (यहूदी पुजारी) अपनी गुणवती पत्नी और दो प्यारे बच्चों के साथ रहता था. एक बार उसे किसी काम से बहुत दिनों के लिए शहर से बाहर जाना पड़ा. जब वह दूर था तब एक त्रासद दुर्घटना में उसके दोनों पुत्र मारे गये. ऐसी दुःख की घड़ी में रब्बाई की पत्नी ने खुद को बड़ी मुश्किल से संभाला. वह बहुत हिम्मती थी और ईश्वर में उसकी आस्था अटूट थी. लेकिन उसे यह चिंता थी कि रब्बाई के लौटने पर वह उसे यह दुखद समाचार किस प्रकार देगी. रब्बाई स्वयं बहुत आस्थावान व्यक्ति था लेकिन वह दिल का मरीज़ था और पूर्व में अस्पताल में भी भर्ती रह चुका था. पत्नी को यह आशंका थी कि वह यह सदमा नहीं झेल पायेगा. पति के आगमन की पूर्व संध्या को उसने दृढ़तापूर्वक प्रार्थना की और शायद उसे अपनी समस्या का कोई समाधान मिल गया. अगली सुबह रब्बाई घर पहुँच गया. बड़े दिनों के बाद घर वापसी पर वह पत्नी से गर्मजोशी से मिला और लड़कों के बारे में पूछा. पत्नी ने कहा, "उनकी चिंता मत कीजिये. आप नहा-धोकर आराम करिए". कुछ समय के बाद वे भोजन करने के लिए बैठे. पत्नी ने उससे यात्रा के बारे में पूछा. रब्बाई ने उ...
राजा भोज और सत्य एक दिन राजा भोज गहरी निद्रा में सोये हुए थे। उन्हें उनके स्वप्न में एक अत्यंत तेजस्वी वृद्ध पुरुष के दर्शन हुए। राजन ने उनसे पुछा- “महात्मन! आप कौन हैं?” वृद्ध ने कहा- “राजन मैं सत्य हूँ और तुझे तेरे कार्यों का वास्तविक रूप दिखाने आया हूँ। मेरे पीछे-पीछे चल आ और अपने कार्यों की वास्तविकता को देख!” राजा भोज उस वृद्ध के पीछे-पीछे चल दिए। राजा भोज बहुत दान, पुण्य, यज्ञ, व्रत, तीर्थ, कथा-कीर्तन करते थे, उन्होंने अनेक तालाब, मंदिर, कुँए, बगीचे आदि भी बनवाए थे। राजा के मन में इन कार्यों के कारण अभिमान आ गया था। वृद्ध  पुरुष के रूप में आये सत्य ने राजा भोज को अपने साथ उनकी कृतियों के पास ले गए। वहाँ जैसे ही सत्य ने पेड़ों को छुआ, सब एक-एक करके सूख गए, बागीचे बंज़र भूमि में बदल गए । राजा इतना देखते ही आश्चर्यचकित रह गया।। फिर सत्य राजा को मंदिर ले गया। सत्य ने जैसे ही मंदिर को छुआ, वह खँडहर में बदल गया। वृद्ध पुरुष ने राजा के यज्ञ, तीर्थ, कथा, पूजन, दान आदि के लिए बने स्थानों, व्यक्तियों, आदि चीजों को ज्यों ही छुआ, वे सब राख हो गए।।राजा यह सब देखकर विक्षिप्त-सा हो ...
THE LAW OF ATTRACTION ( आकर्षण  का  सिद्धांत) The  Law of Attraction  या  आकर्षण  का  सिद्धांत  यह  कहता  है  कि  आप  अपने  जीवन  में  उस  चीज  को  आकर्षित  करते  हैं  जिसके  बारे  में  आप  सोचते  हैं .  आपकी  प्रबल सोच हकीक़त  बनने  का  कोई  ना  कोई  रास्ता  निकाल लेती है .  लेकिन  Law of Attraction कुछ  ऐसे  प्रश्नों  को  जन्म  देता  है  जिसके  उत्तर  आसान  नहीं  हैं .पर  मेरा  मानना  है  कि  problem Law of Attraction कि  वजह  से  नहीं  है   बल्कि  इससे  है  कि  Law of Attraction को  objective reality (वस्तुनिष्ठ वास्तविकता ) में  कैसे  apply करते  हैं . यहाँ  ऐसे  ही  कुछ  problematic questions दिए  गए  हैं...